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Arya Samaj Vivah in New Friends Colony

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Benefits of Arya Samaj Vivah in New Friends Colony

Why This Location Is Ideal for Couples

वैदिक संस्कृति में विवाह को एक उच्चकोटि का धार्मिक और आध्यात्मिक बंधन माना गया है, जो मात्र दो शरीरों का नहीं बल्कि दो आत्माओं का मिलन है। 'विवाह' शब्द में 'वि' उपसर्ग विशिष्टता को दर्शाता है और 'वाह' का अर्थ यान या ले जाना होता है, जो जीवन की यात्रा को सुगम बनाता है। यह एक ऐसा पवित्र संस्कार है जो व्यक्ति को स्वार्थ से ऊपर उठाकर परमार्थ और परिवार के प्रति समर्पित होने की प्रेरणा देता है।

दार्शनिक रूप से विवाह एक ऐसे 'शकट' या रथ के समान है जिसमें स्त्री और पुरुष दो समान पहियों की भूमिका निभाते हैं, जिनका आपसी सामंजस्य अनिवार्य है। इस जीवन-रूपी रथ को चलाने के लिए पति-पत्नी के बीच पूर्ण साम्य, सङ्गति और सद्गति का होना आवश्यक है ताकि गृहस्थी की गाड़ी बिना किसी अवरोध के आगे बढ़ सके। जब दो प्राणी प्रेमपूर्वक आकर्षित होकर अपनी आत्मा, हृदय और शरीर को एक-दूसरे को अर्पित करते हैं, तभी वह सच्चे अर्थों में विवाह कहलाता है।

व्यावहारिक दृष्टिकोण से विवाह का अर्थ गृहस्थ आश्रम के गंभीर उत्तरदायित्वों को 'विशेष रूप से वहन' करना है, जिससे समाज और धर्म की मर्यादा बनी रहे। इसका एक अन्य अर्थ 'प्रयत्न करना' भी है, क्योंकि यह वह क्रिया है जिसके माध्यम से स्त्री-पुरुष एक विशिष्ट रीति से गृहस्थाश्रम की जिम्मेदारियों को स्वीकार करते हैं। अतः विवाह वह माध्यम है जो मनुष्य को संयमित जीवन जीने और श्रेष्ठ संतान के माध्यम से कुल की परंपरा को आगे बढ़ाने की शक्ति प्रदान करता है।

Arya Samaj Vivah in New Friends Colony

Eligibility, Documents & Fees

Essential Requirements for Arya Samaj Vivah in New Friends Colony

Arya Samaj Marriage का हर चरण वैदिक परंपराओं में समाहित है और इसका गहरा आध्यात्मिक अर्थ है। पारंपरिक रीति-रिवाजों के विपरीत, जहाँ रस्में बिना सोचे-समझे की जाती हैं, यहाँ पंडित जी यह सुनिश्चित करते हैं कि जोड़ा हर वचन के महत्व को गहराई से समझे।

मुख्य अनुष्ठान इस प्रकार हैं:

स्वागत और संकल्प – समारोह की शुरुआत ईश्वर के आशीर्वाद के साथ होती है। वर-वधू ईमानदारी, प्रेम और आपसी सम्मान के साथ दांपत्य जीवन में प्रवेश करने का शुद्ध संकल्प लेते हैं।  

मधुपर्क विधि – दूल्हे का स्वागत शहद, दही और घी के पवित्र मिश्रण से किया जाता है, जो नए रिश्ते में पवित्रता, मिठास और समृद्धि का प्रतीक है।  

कन्यादान – वधू के माता-पिता अपनी पुत्री का हाथ वर को सौंपते हैं, उसे जीवन भर रक्षा, सम्मान और सहयोग की जिम्मेदारी देते हैं। यह रस्म स्वामित्व के बजाय समानता पर जोर देती है।  

हवन (पवित्र अग्नि अनुष्ठान) – पवित्र अग्नि (अग्नि देव) को दिव्य साक्षी मानकर प्रज्वलित किया जाता है। सुख, शांति और सामंजस्य के लिए वैदिक मंत्रों के साथ आहुतियां दी जाती हैं।  

पाणिग्रहण (वधू का स्वीकार) – वर, वधू का हाथ थामकर जीवन भर गरिमा, विश्वास और देखभाल के साथ साथ चलने का वचन देता है।  

सप्तपदी (अग्नि के सात फेरे) – सबसे महत्वपूर्ण रस्म, जहाँ जोड़ा सात पवित्र कदम उठाता है। प्रत्येक कदम एक वादा है: पोषण, शक्ति, धन, सुख, संतान, सद्भाव और अटूट मित्रता।  

सिंदूर और मंगलसूत्र – अंत में, वर वधू की मांग भरता है और मंगलसूत्र पहनाता है, जो उनके वैवाहिक बंधन और आजीवन साझेदारी का प्रतीक है।

महान्त्यपि रिचानि गोऽ जाविध्नधान्यतः। स्त्रीसम्बन्धे दशैतानि कुलानि परिवर्जयेत् ॥ हीनक्रियं निश्पुरुषं निश्छन्दो रोमशार्षसम्। क्षययामायाव्यापस्मारिश्वित्रिकुष्ठिकुलानि च ॥

-मनु0

कुल चाहे कितना भी धनवान क्यों न हो, विवाह के चयन में इन दस प्रकार के कुलों (परिवारों) से दूरी बनानी चाहिए:

१. जो सत्कर्मों और मर्यादाओं से हीन हों। २. जहाँ नेक और विद्वान पुरुषों का अभाव हो। ३. जो वेदों के ज्ञान और स्वाध्याय से विमुख हों। ४. जिस कुल में शरीर पर बहुत अधिक घने बाल (आनुवंशिक दोष) हों। ५. जहाँ बवासीर जैसी बीमारियों का इतिहास हो। ६. जिस कुल में टीबी (राजयोग) का प्रकोप हो। ७. जहाँ पाचन शक्ति बहुत कमजोर या मंद हो। ८. मिर्गी या मानसिक रोगों से ग्रस्त कुल। ९. सफेद दाग से प्रभावित कुल। १०. कुष्ठ रोग से पीड़ित परिवार।

ऐसे कुलों में विवाह न करने की सलाह दी गई है क्योंकि ये शारीरिक और मानसिक दोष अगली पीढ़ी में भी प्रवेश कर सकते हैं। आज के समय में लोग केवल बाहरी चमक और पैसा देखते हैं, गुणों पर ध्यान नहीं देते।

डारविन महोदय ने भी इस पर सटीक टिप्पणी की है:

"Man sees with scrupulous care the character and pedigree of his horse, cattle and dogs, before he matches them, but when he comes to his own marriage he rarely or never takes such care."

मनुष्य जब अपने पशुओं (घोड़े, कुत्ता) की नस्ल मिलाता है, तो उनके गुण और बल को बड़ी बारीकी से देखता है, लेकिन जब खुद के विवाह की बारी आती है, तो वह इन गुणों और स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं देता।

वैदिक धर्म में वर-वधू के गुण, कर्म और स्वभाव के मिलान पर सबसे अधिक बल दिया गया है। प्रसिद्ध डॉक्टर मैगनस हिर्श फील्ड ने भी लिखा है:

"Happy marriages are not made in heavens but in the laboratory; both the man and woman should be carefully examined not only with regard to their fitness to marry but whether they are fit to marry each other."

विवाह कितने प्रकार का होता है शास्त्रों के अनुसार विवाह आठ प्रकार के बताए गए हैं:

  • 1- ब्राह्म विवाह – जो कन्या के योग्य, विद्वान और सुशील पुरुष का सत्कार करके उसे सम्मानपूर्वक घर बुलाकर वस्त्राभूषणों से सुसज्जित कन्या सौंपता है, वह 'ब्राह्म विवाह' है। यह सर्वोत्तम है।

  • 2- देव विवाह – किसी बड़े यज्ञ के दौरान, उस कर्म को संपन्न करने वाले विद्वान को आभूषणों से अलंकृत कन्या प्रदान करना 'देव विवाह' कहलाता है।

  • 3- आर्ष विवाह – बिना किसी लेन-देन के, वर और कन्या की आपसी सहमति और प्रसन्नता से होने वाला विवाह 'आर्ष विवाह' है।

  • 4- प्राजापत्य विवाह – जहाँ वर-वधू को यज्ञशाला में यह निर्देश दिया जाता है कि तुम दोनों मिलकर गृहस्थ धर्म का पालन करो और फिर प्रसन्नतापूर्वक विवाह संपन्न हो, वह 'प्राजापत्य' है।

  • ये ऊपर के 4 विवाह ही "उत्तम" श्रेणी में आते हैं।

  • 5- आसुर विवाह – कन्या के परिवार को धन या संपत्ति देकर, एक तरह से खरीदकर किया गया विवाह 'आसुर विवाह' कहलाता है।

  • 6- गान्धर्व विवाह – बिना बड़ों की अनुमति के, केवल काम-वासना या आकर्षण के वश में होकर गुप्त रूप से संबंध बना लेना 'गान्धर्व विवाह' है।

  • 7- राक्षस विवाह – किसी कन्या का अपहरण करके, मारपीट या बल प्रयोग के माध्यम से रोती-बिलखती कन्या से विवाह करना 'राक्षस विवाह' है, जो अत्यंत नीच है।

  • 8- पैशाच विवाह – सोती हुई, नशे में धुत या मानसिक रूप से अस्वस्थ कन्या के साथ एकांत में कुकर्म करके विवाह करना 'पैशाच विवाह' है। यह सबसे दुष्ट और घृणित प्रकार है।

ब्राह्म, दैव, आर्ष और प्राजापत्य विवाहों से जो संतान पैदा होती है, वह तेजस्वी, विद्वान और धर्मात्मा होती है। ऐसी संतान दीर्घायु (100 वर्ष) होती है और समाज का कल्याण करती है। इसके विपरीत, शेष 4 (असुर, गंधर्व, राक्षस, पैशाच) से उत्पन्न संतान अक्सर अधर्मी, मिथ्यावादी और नीच स्वभाव वाली होती है।

प्रश्न – विवाह पास में करना चाहिए या दूर? उत्तर – निरुक्त के प्रमाण (दुहिता दुर्हिता दूरे हित भवतिति) के अनुसार, विवाह जितना दूर के क्षेत्र में हो, उतना ही लाभदायक रहता है।

विवाह संस्कार की मुख्य विधियाँ-

1- स्वागत विधि 2- मधुपर्क विधि 3- गोदान विधि 4- कन्यादान विधि 5- वस्त्र विधि 6- ऋत्विक् वरण एवं संकल्प 7- वैवाहिक यज्ञ विधि (प्रधान होम, राष्ट्रपभृत, जया, अभ्यातन, आष्टाज्याहुति) 8- पाणिग्रहण विधि 9- लाजा होम 10- ग्रंथि बंधन 11- सप्तपदी 12- सुमंगली एवं यज्ञ समापन 13- आशीर्वाद

सुमङ्गलीरियं वधूरिमां समेत पश्यत। सौभाग्यमस्यै दत्वायाथास्तं विरेतन,

इस मंत्र के पश्चात उपस्थित सभी लोग नव-दंपति को देखते हुए यह आशीर्वाद देते हैं:

ओंम् सौभाग्यमस्तु। ओम् शुभं भवतु॥

वे वर-वधू पर पुष्पों की वर्षा कर उनके सुखी जीवन की कामना करते हैं।

Arya Samaj Marriage Certificate

Step-by-Step Marriage Process

How the Arya Samaj Vivah Is Performed in New Friends Colony

आर्य समाज विवाह आध्यात्मिक पवित्रता और कानूनी सुरक्षा का एक अनूठा संगम है, जो इसे आधुनिक जोड़ों के बीच अत्यधिक पसंदीदा बनाता है।

इसके मुख्य लाभ इस प्रकार हैं:

  • कानूनी वैधता (Legal Validity): हिंदू विवाह अधिनियम (Hindu Marriage Act) के तहत मान्यता प्राप्त, इसका विवाह प्रमाण पत्र पासपोर्ट, वीजा, बैंक खाते और अन्य आधिकारिक रिकॉर्ड के लिए पूरी तरह मान्य है।

  • किफायती (Affordability): बिना किसी भव्य सजावट या लंबे ताम-झाम के, पारंपरिक शादियों की तुलना में इसका खर्च बहुत ही कम होता है।

  • समय की बचत (Time Efficiency): पूरा समारोह एक ही दिन में संपन्न हो जाता है, जिससे हफ़्तों की योजना बनाने की ज़रूरत नहीं पड़ती। यह व्यस्त पेशेवरों या परेशानी मुक्त शादी चाहने वाले जोड़ों के लिए आदर्श है।

  • समानता और समावेशिता (Equality & Inclusivity): आर्य समाज प्रेम विवाह, अंतरजातीय विवाह और पुनर्विवाह को प्रोत्साहित करता है, जिससे सामाजिक बाधाएं टूटती हैं और समानता को बढ़ावा मिलता है।

आध्यात्मिक महत्व (Spiritual Significance): जोड़ों को वास्तविक वैदिक रीति-रिवाजों का अनुभव मिलता है, जहाँ वे प्रतिबद्धता, सम्मान और आपसी विकास के सार को समझते हैं, जो शादी को गहराई से सार्थक और यादगार बनाता है।

Arya Samaj Mandir in New Friends Colony

।। ओ३म् ।।

Arya samaj Pandit Ji

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Frequently Asked Questions

Arya Samaj vivah is a Vedic wedding ceremony that is simple, quick, and affordable. It avoids lavish rituals, promotes equality, and is legally recognized in India.

Yes. Arya Samaj vivah are valid under the Hindu Marriage Act, 1955. Couples receive a legal marriage certificate that can be used for passports, visas, and other official purposes.

Hindus, Sikhs, Jains, and Buddhists can directly marry. Inter-caste and inter-religion couples can marry after a simple Shuddhi (conversion) ceremony.

You need age proof, address proof, passport-size photographs, and two witnesses with valid ID. Divorcees or widows must provide legal proof.

The complete process, including Havan, mantras, and Saptapadi, takes 1–2 hours, followed by issuing the vivah certificate.