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सृष्टि रचाने वाले, कितना महान है तू

आर्य समाज भजन

सृष्टि रचाने वाले, कितना महान है तू

आर्य समाज का भावपूर्ण ईश्वर-स्तुति भजन

✨ भजन का परिचय

“सृष्टि रचाने वाले, कितना महान है तू” एक अत्यंत भावपूर्ण और गूढ़ अर्थ वाला भजन है, जो ईश्वर की निराकार सत्ता, करुणा, न्याय और सृष्टि-नियंत्रण शक्ति का वर्णन करता है। यह भजन विशेष रूप से आर्य समाज के सत्संग, यज्ञ, हवन और प्रार्थना सभाओं में गाया जाता है।

इस भजन में भक्त यह अनुभव करता है कि ईश्वर दिखाई नहीं देता, फिर भी संपूर्ण सृष्टि में उसकी उपस्थिति स्पष्ट रूप से विद्यमान है।

📿 भजन के बोल (Bhajan Lyrics)

सूरज बनाया तूने, चंदा रचाया तूने
तारों को रोशनी दी, नभ को सजाया तूने
सब कुछ बनाया तूने, पर लापता है क्यों तू
दाता दया के सागर, सृष्टि रचाने वाले...

सारे जहां के वाली, ऐ गुलशनों के माली
हर चीज से है जाहिर, हिकमत तेरी निराली
फूलों में तेरी लाली, पर बेनिशान है तू
दाता दया के सागर, सृष्टि रचाने वाले...

पापी जो पाप करते, नहीं तेरा जाप करते
अपने किए कर्म पर, न पश्चाताप करते
उन पर भी मेहर तेरी, कैसा मेहरबान है तू
दाता दया के सागर, सृष्टि रचाने वाले...

'बेमोल' बैठे पंछी, तुझको ही भज रहे हैं
ऊँचे पहाड़ टीले, दुल्हन से सज रहे हैं
नगमे से बजे रहे हैं, मीठी सी तान है तू

दाता दया के सागर, प्राणों का प्राण है तू
सृष्टि रचाने वाले, कितना महान है तू
दाता दया के सागर, प्राणों का प्राण है तू

🕉️ भजन का अर्थ एवं भावार्थ (Arth / Explanation)

1. सृष्टि का निर्माण और ईश्वर की महानता

भजन की शुरुआत सूर्य, चंद्रमा, तारे और आकाश के माध्यम से यह बताती है कि पूरी सृष्टि एक सुव्यवस्थित नियम के अंतर्गत बनी है, और उसका रचयिता ईश्वर है। वह दिखाई नहीं देता, लेकिन उसका अस्तित्व हर जगह स्पष्ट है।

2. निराकार ईश्वर की पहचान

“पर लापता है क्यों तू” यह पंक्ति यह स्पष्ट करती है कि ईश्वर निराकार और अदृश्य है। आर्य समाज के अनुसार ईश्वर किसी मूर्ति या रूप में नहीं, बल्कि नियम, व्यवस्था और चेतना के रूप में विद्यमान है।

3. ईश्वर की हिकमत और करुणा

फूलों की सुंदरता, प्रकृति की रंगत और सृष्टि की व्यवस्था—ये सभी ईश्वर की हिकमत (बुद्धिमत्ता) को दर्शाते हैं। वह बिना किसी पहचान के भी सबका पालन करता है।

4. कर्म सिद्धांत और दया

भजन में यह गहरी बात कही गई है कि जो लोग पाप करते हैं, ईश्वर का स्मरण नहीं करते, फिर भी ईश्वर उन पर दया करता है। यह आर्य समाज के कर्म-सिद्धांत और ईश्वर की करुणा—दोनों को दर्शाता है।

5. प्रकृति भी ईश्वर की उपासना करती है

पक्षी, पहाड़, नदियाँ, प्रकृति—सब अपने-अपने ढंग से ईश्वर का गुणगान कर रहे हैं। इससे यह संदेश मिलता है कि पूरा ब्रह्मांड ईश्वर की स्तुति में लीन है।

🔱 आर्य समाज के दृष्टिकोण से इस भजन का महत्व

ईश्वर निराकार, सर्वव्यापक और न्यायकारी है

सृष्टि नियमों से चलती है, चमत्कार से नहीं

कर्म का फल निश्चित है

प्रकृति ही ईश्वर की सबसे बड़ी प्रमाणिक पहचान है

यह भजन स्वामी दयानंद सरस्वती जी की वैदिक शिक्षाओं का सजीव रूप है।

🎧 भजन सुनने के लिए

यदि आप यह भजन “सृष्टि रचाने वाले, कितना महान है तू” सुनना चाहते हैं, तो आप इसे YouTube पर भी सुन सकते हैं।

👉 नीचे दिए गए YouTube लिंक पर क्लिक करके भजन सुनें Link

।। ओ३म् ।।

Arya samaj Pandit Ji

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