हे प्रभु आनंद-दाता, ज्ञान हमको दीजिए – आर्य समाज भजन
पूरा भजन, अर्थ (Arth), भावार्थ और आर्य समाज में इसका महत्व
आर्य समाज का प्रसिद्ध भजन “हे प्रभु आनंद-दाता, ज्ञान हमको दीजिए”
आर्य समाज में गाए जाने वाले भजन केवल संगीत नहीं होते, बल्कि वे वैदिक जीवन-दर्शन, सदाचार और आत्मशुद्धि का मार्ग दिखाते हैं। “हे प्रभु आनंद-दाता, ज्ञान हमको दीजिए” आर्य समाज का एक अत्यंत लोकप्रिय और भावपूर्ण भजन है, जिसे यज्ञ, हवन, सत्संग, प्रार्थना सभा एवं विशेष धार्मिक अवसरों पर श्रद्धा के साथ गाया जाता है।
यह भजन परमात्मा से ज्ञान, सद्बुद्धि, सदाचार, ब्रह्मचर्य और समाज-कल्याण की प्रार्थना करता है।
📿 भजन का पूरा पाठ (Bhajan Lyrics)
हे प्रभु आनंद-दाता, ज्ञान हमको दीजिए,
शीघ्र सारे दुर्गुणों को, दूर हमसे कीजिए।
लीजिए हमको शरण में, हम सदाचारी बनें,
ब्रह्मचारी धर्म-रक्षक, वीर व्रत धारी बनें।
॥ हे प्रभु आनंद-दाता, ज्ञान हमको दीजिए…॥
निंदा किसी की हम किसी से, भूल कर भी न करें,
ईर्ष्या कभी भी हम किसी से, भूल कर भी न करें।
सत्य बोलें, झूठ त्यागें, मेल आपस में करें,
दिव्य जीवन हो हमारा, यश तेरा गाया करें।
॥ हे प्रभु आनंद-दाता, ज्ञान हमको दीजिए…॥
जाए हमारी आयु हे प्रभु, लोक के उपकार में,
हाथ डालें हम कभी न, भूल कर अपकार में।
कीजिए हम पर कृपा, ऐसी हे परमात्मा,
मोह मद मत्सर रहित, होवे हमारी आत्मा।
॥ हे प्रभु आनंद-दाता, ज्ञान हमको दीजिए…॥
प्रेम से हम गुरु जनों की, नित्य ही सेवा करें,
प्रेम से हम संस्कृति की, नित्य ही सेवा करें।
योग विद्या ब्रह्म विद्या, हो अधिक प्यारी हमें,
ब्रह्म निष्ठा प्राप्त कर के, सर्व हितकारी बनें।
॥ हे प्रभु आनंद-दाता, ज्ञान हमको दीजिए…॥
हे प्रभु आनंद-दाता, ज्ञान हमको दीजिए,
शीघ्र सारे दुर्गुणों को, दूर हमसे कीजिए।
🕉️ भजन का अर्थ एवं भावार्थ (Bhajan Arth)
1. ज्ञान की प्रार्थना और दुर्गुणों का त्याग
इस भजन की शुरुआत में ईश्वर से यह प्रार्थना की गई है कि वह हमें सच्चा ज्ञान दें, जिससे हमारे भीतर के सभी दुर्गुण—जैसे क्रोध, लोभ, अहंकार और मोह—नष्ट हो जाएँ। आर्य समाज के अनुसार ज्ञान ही अज्ञान का नाश करता है।
2. सदाचार और ब्रह्मचर्य का आदर्श
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भजन में मनुष्य यह संकल्प लेता है कि वह
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सदाचारी बने
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ब्रह्मचर्य का पालन करे
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धर्म और सत्य की रक्षा करने वाला बने
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यह आर्य समाज के नैतिक जीवन मूल्यों को दर्शाता है।
3. निंदा, ईर्ष्या और झूठ से दूर रहने की शिक्षा
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यह भजन सिखाता है कि किसी की निंदा करना और ईर्ष्या करना मनुष्य के पतन का कारण है।
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सत्य बोलना, झूठ का त्याग करना और आपसी मेल-मिलाप बनाए रखना ही दिव्य जीवन है।
4. परोपकार और समाज-सेवा का संदेश
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भजन में यह भावना व्यक्त की गई है कि हमारा जीवन लोक-कल्याण और परोपकार में व्यतीत हो।
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अपकार से दूर रहकर समाज के हित में कार्य करना ही सच्चा धर्म है।
5. आत्मिक शुद्धि और वैराग्य
- मोह, मद और मत्सर जैसे विकार आत्मा को बाँधते हैं।
- इस भजन के माध्यम से एक शुद्ध, निर्मल और निर्लिप्त आत्मा की कामना की गई है।
6. गुरु-सेवा, संस्कृति और वैदिक विद्या
गुरुजनों की सेवा, भारतीय वैदिक संस्कृति का संरक्षण, योग और ब्रह्मविद्या का अभ्यास—ये सभी आर्य समाज की मूल शिक्षाएँ हैं, जिन्हें यह भजन अत्यंत सुंदर ढंग से प्रस्तुत करता है।
🔱 आर्य समाज में इस भजन का महत्व
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यह भजन स्वामी दयानंद सरस्वती जी की शिक्षाओं—
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सत्य, तप, ब्रह्मचर्य, सेवा और वेद-आधारित जीवन—का सार है।
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इसी कारण यह भजन आर्य समाज के हर धार्मिक आयोजन में प्रमुख स्थान रखता है।
🎧भजन सुनने के लिए
यदि आप ‘ प्रभु आनंद-दाता, ज्ञान हमको दीजिए’ भजन को पूरी तरह सुनना चाहते हैं, तो आप इसे आसानी से YouTube पर सुन सकते हैं। हमने भजन के बोल भी यहाँ लिखकर दिए हैं ताकि आप साथ में गा सकें या पढ़ सकें। नीचे लिंक पर क्लिक करके ऑडियो/वीडियो का आनंद लें:”
YouTube Link : हे ज्ञानवान भगवान – भजन
।। ओ३म् ।।
Arya samaj Pandit Ji
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